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राजस्थान में ओबीसी आरक्षण को लेकर गर्माया मामला सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

The issue of OBC reservation in Rajasthan heated up, people took to the streets against the government

राजस्थान में ओबीसी आरक्षण को लेकर गर्माया मामला सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

 

जयपुर. प्रदेश में सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमो में बदलाव के बाद ओबीसी वर्ग में युवाओं को हो रहे नुकसान के खिलाफ नियमों में संशोधन की मांग को लेकर सोमवार को प्रदेश भर में लोग सड़कों पर उतरे. ओबीसी के 21 फीसदी आरक्षण में भूतपूर्व सैनिकों का कोटा शामिल करने के मामले को लेकर ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेश भर में आंदोलन किया जा रहा है|

सोमवार को इसी मांग को लेकर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और उपखण्ड मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया. बाड़मेर में पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन किया गया. राजधानी जयपुर में राजस्थान यूनिवर्सिटी में भी बड़ी संख्या में युवा एकत्रित हुए और यूनिवर्सिटी परिषर में रैली निकालकर विरोध जताया. शाम को मुख्यमंत्री के निर्देश पर 12 सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल ने सीएमओ के उच्चाधिकारियों से वार्ता की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ.

जिसके बाद ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति ने प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है. हरीश चौधरी ने सोमवार को बाड़मेर में सैकड़ों युवाओं के साथ मार्च निकाला और ज्ञापन दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि राजस्थान में ओबीसी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है. बीजेपी नेता कर्नल सोनाराम ने भी उनका समर्थन किया. चौधरी ने गहलोत सरकार से ओबीसी आरक्षण की विसंगतियां दूर करने की मांग की. चौधरी सरकारी भर्तियों को लेकर कार्मिक विभाग की ओर से जारी रोस्टर को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. वहीं बहरोड़ विधायक बलजीत यादव ने गहलोत सरकार को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार पिछली सरकार के 17 अप्रैल 2018 के तुगलकी आदेश को तुरंत बंद करें. साथ ही उससे पहले जो आरक्षण की व्यवस्था थी उसे फिर से शुरू करे.

यह है मामला
दरअसल ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा यह विरोध प्रदर्शन कार्मिक विभाग द्वारा 17 अप्रैल 2018 को आरक्षण के नियमों में संशोधन के जारी किये आदेश के खिलाफ किया जा रहा है. राजस्थान यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व आरएएस अधिकारी रहे जस्सा राम चौधरी, पूर्व आरपीएस महेंद्र चौधरी और डॉ रामसिंह सामोता ने बताया कि 2018 में ओबीसी सहित अन्य कैटेगरी के आरक्षण में भूतपूर्व सैनिकों के आरक्षण कोटे को खत्म कर मूल भर्ती के कुल पदों में से भूतपूर्व सैनिकों का 12.5 % कोटा तय किया गया है. इससे कुल पदों में ओबीसी की आबादी ज्यादा होने से भूतपूर्व सैनिकों में सबसे ज्यादा ओबीसी के भूतपूर्व सैनिकों का चयन होता है. इसके बाद सरकार इन भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण वर्गों की कैटेगरी में से कटौती करती है. इससे ओबीसी के 21% आरक्षण कोटे के अधिकांश पदों पर भूतपूर्व सैनिकों का चयन हो जाता है और मूल वर्ग के युवाओं को मौका नहीं मिल पाता.

नियमों में बदलाव से ओबीसी वर्ग को हो रहे नुकसान को लेकर पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने मोर्चा खोला. उन्होंने युवाओं को आगे लाकर प्रदेश भर में जन जागरण अभियान शुरू किया. अभियान के तहत प्रदेश भर में सभी स्थानों पर छोटी-छोटी सभा कर लोगों को जागरूक किया गया. जिसके बाद सोशल मीडिया के जरिए अभियान चलाया गया. साथ ही वरिष्ठ मंत्री, विधायक और नेताओं ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नियमों में बदलाव की मांग की लेकिन कोई समाधान नहीं निकलने पर सोमवार को प्रदेश हर में विरोध प्रदर्शन किया गया.

मोनिका ईनानियाँ

नमस्कार मित्रो, मैं मोनिका ईनानियाँ एम. ए. & एम फिल मैं आपको शिक्षा जगत की हर एक हलचल से करवाउंगी अपडेट !!

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